पढ़िए अंतर्राष्ट्रीय कायस्थ काव्य मंच पर भोपाल, मध्यप्रदेश से नितिका वर्मा की रचना
फागुनी बयार हो (गीत) प्रियतम हो साथ में, फागुनी बयार हो । वासंती रंगों से रंजित संसार हो । ताड़न, प्रतिताड़न, उत्पीड़न की पीड़ाएँ- हों विलीन, हों समाज में नित नाव क्रीड़ाएँ । मानवता के गले में खुशियों का हार हो । वासंती रंगों से रंजीत संसार हो । हिन्दू के गालों पर मुस्लिम रंग बिखराएँ, … Read more